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Saturday, 10 October 2026

श्रद्धा लोक महाथेरो की अध्यक्षता में हुआ धार्मिक आयोजन, बुद्धं शरणं गच्छामि के उद्घोष से गूंजा परिसर

दैनिक सत्ता मंत्र
श्रावस्ती। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में सोमवार को श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों ने ऐतिहासिक गंध कुटी पर श्रद्धा एवं आस्था के साथ पुष्प पूजा की। पूजा कार्यक्रम बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस दौरान बौद्ध अनुयायियों ने भगवान बुद्ध को पुष्प अर्पित कर विश्व शांति एवं मानव कल्याण की कामना की। बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पुष्प का विशेष एवं उच्च स्थान है। देवी-देवताओं और भगवान की पूजा में आरती, व्रत, उपवास तथा विभिन्न पर्वों पर पुष्प अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक अनुष्ठान, संस्कार तथा सामाजिक एवं पारिवारिक आयोजनों में भी पुष्प का विशेष महत्व माना जाता है। उन्होंने कहा कि पुष्प सुंदरता, सुगंध, उल्लास और प्रसन्नता के प्रतीक हैं। भारतीय परंपरा में पुष्पों को पवित्रता और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। भगवान को अर्पित की जाने वाली पुष्प मालाओं में कमल अथवा पुंडरीक की माला को विशेष महत्व दिया गया है। पूजन कार्यक्रम के बाद श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों ने गंध कुटी की परिक्रमा की और श्रद्धापूर्वक “बुद्धं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि” का उद्घोष किया। इससे पूरा परिसर बुद्धमय हो उठा। भ्रमण के दौरान बौद्ध अनुयायियों ने श्रावस्ती के विभिन्न प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्थलों का भी दर्शन किया। उन्होंने कौशांबी कुटी, बोधि वृक्ष, सूर्यकुंड, शिवली स्तूप, कच्ची कुटी और पक्की कुटी सहित अन्य स्थलों के इतिहास एवं धार्मिक महत्व की जानकारी प्राप्त की। श्रीलंका से आए श्रद्धालुओं ने श्रावस्ती की प्राचीन बौद्ध विरासत को नजदीक से जाना और यहां के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान बौद्ध अनुयायियों में विशेष उत्साह एवं आध्यात्मिक भाव देखने को मिला।

लेखक
asif.ali27march
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