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Saturday, 10 October 2026

चर्चा का विषय बनी तीन समितियों की सक्रियता, एक समिति बनाने की उठी मांग

दैनिक सत्ता मंत्र
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर। कस्बे के श्रीराम जानकी मंदिर में इन दिनों तीन अलग-अलग मंदिर सेवा समितियों की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की तैयारियों के बीच तीनों समितियां अपने-अपने स्तर पर बैठकें और तैयारियां कर रही हैं, जिससे नगर में एक ही समिति के गठन की मांग तेज हो गई है। जानकारों के अनुसार, पूर्व में एक व्यक्ति द्वारा तत्कालीन समिति पर लगाए गए आरोपों के बाद पुरानी समिति भंग कर दी गई थी। इसके बाद रविकांत अग्रहरि (रिक्की) को एक माह के लिए कार्यवाहक अध्यक्ष बनाकर नई समिति के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई। बाद में उनके द्वारा गठित समिति को लेकर भी सवाल उठे और चर्चा शुरू हो गई कि समिति का गठन निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं हुआ। इसी बीच पुरानी समिति को बहाल करने की मांग उठी। हालांकि पदाधिकारियों द्वारा असमर्थता जताने के बाद हुई बैठक में सर्वसम्मति से नंदू गौड़ को श्रीराम जानकी मंदिर सेवा समिति का अध्यक्ष चुना गया। वहीं बाद में राजेंद्र रुंगटा (नीलू) के नेतृत्व में एक अन्य समिति का भी गठन कर दिया गया। वर्तमान में मंदिर से जुड़ी तीन समितियों के सक्रिय होने से नगर में विभिन्न तरह की चर्चाएं चल रही हैं। राजेंद्र रुंगटा (नीलू) ने बताया कि उनकी समिति ने 20 जुलाई को बैठक कर 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव भव्य रूप से मनाने का निर्णय लिया है। कार्यक्रम के लिए भजन गायक पप्पू लक्खा, अवधेश जी, आशीष भट्ट (दिल्ली) सहित अन्य कलाकारों की बुकिंग की जा चुकी है। म्यूजिकल बैंड, साउंड सिस्टम तथा फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी की व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं। वहीं 30 जुलाई को नंदू गौड़ की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी जन्माष्टमी महोत्सव को भव्य बनाने, भजन संध्या आयोजित करने तथा समिति सदस्यों के बीच जिम्मेदारियों का वितरण करने का निर्णय लिया गया। नंदू गौड़ ने कहा कि उनकी समिति की तैयारियां पूरी हैं। उन्होंने मंदिर के विकास के लिए सभी नई समितियों को समाप्त कर पुरानी समिति को पुनः बहाल करने की बात कही। उनका दावा है कि पूर्व में लगाए गए आरोप निराधार साबित हुए थे। उधर चेयरमैन प्रतिनिधि रवि अग्रवाल ने कहा कि पुरानी समिति का कार्यकाल बेहतर रहा। वर्तमान में कई गुट सक्रिय होने से अनावश्यक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिससे मंदिर की गरिमा प्रभावित हो रही है। उन्होंने सर्वसमाज की बैठक बुलाकर सभी समितियों को एक मंच पर लाने और एक सर्वमान्य समिति गठित करने का सुझाव दिया। भारतीय मानवाधिकार परिवार के पूर्व नगर अध्यक्ष एवं व्यवसायी दीपक कौशल ने भी कहा कि सावन और जन्माष्टमी जैसे प्रमुख धार्मिक आयोजनों को देखते हुए सभी पक्षों को आपसी मतभेद भुलाकर एक सामूहिक बैठक करनी चाहिए, ताकि मंदिर की परंपरा, व्यवस्था और धार्मिक आयोजनों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। नगर के लोगों का मानना है कि श्रीराम जानकी मंदिर पूरे क्षेत्र की आस्था का केंद्र है। ऐसे में व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सर्वसम्मति से एक समिति का गठन किया जाना मंदिर और श्रद्धालुओं दोनों के हित में होगा।

लेखक
asif.ali27march
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