भारतीय पर नेपालियों के हितों में नेपाली संसद में विक्रम की बुलंद हुई आवाज

दैनिक बुद्ध का संदेश
बलरामपुर। सत्ता धारी दल के सांसद विक्रम सिंह थापा नें भारत -नेपाल के बीच सीमा पर आवागमन को और सहज बनाने का मुद्दा नेपाली संसद में ओजस्वी औऱ जोरदार ढंग से उठाया। सांसद विक्रम थापा नें भारत से नेपाल जाने वाले चार पहिया और दो पहिया भारतीय वाहनों पर अवधि समाप्ति के उपरांत लगाए जाने वाले ढाई हजार तथा दो हज़ार रूपये के जुर्माने पर सरकार से पुनर्विचार करने का आग्रह किया। ज्वलंत पीड़ा दायक मुद्दों के समाधान हेतु संसद में आवाज उठाने से विक्रम थापा नेपाल तथा भारत के करोड़ों आम जन मानस में हीरो बन गए। सांसद विक्रम थापा के इस जोरदार पहल से भारत नेपाल के करोड़ों जन के मनों में एक नई आशा के संचार की दीप प्रज्वलित हुई है। खासकर भारतीय पर्यटक ऑन को इंडो नेपाल बॉर्डर के आर पार खुशियों के लहर का ब्रेक फेल सा हो गया है।नेपाल में बैलेंस सरकार आते ही कई कठोर निर्णय लिए इस श्रृंखला में नेपाल भारत सीमा में प्रवेश करने वाले भारतीय दो पहिया और चार पहिया वाहनों की अस्थाई पैठारी (कस्टम शुल्क) की सीमा समाप्त होने पर चार पहिया वाहन पर प्रतिदिन के हिसाब से 2500 नेपाली मुद्रा का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान लागू किया। इसी प्रकार दो पहिया वाहनों पर 1200 रुपए का जुर्माना ठोंका गया। नेपाल सरकार के इस निर्णय से विचलित करने वाली विषम परिस्थितियों ने जन्म लिया। भारत नेपाल की करोड़ जनता पर इस निर्णय से ऐतिहासिक ही नहीं युग युगांतर के मैत्रीय रिश्तों पर प्रतिकूल और व्यापक प्रभाव पड़ा।आंकड़ों पर गौर किया जाए तो नेपाल राष्ट्र में 7 लाख भारतीय परिवार रहते हैं। नेपाल राष्ट्र से भारत के पांच राज्यों क्रमशः उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल तथा सिक्किम की 1751 किलोमीटर खुली सीमा सीधे स्पर्श करती है। इन सीमावर्ती क्षेत्रों को मधेश तथा तराई के नाम से जाना जाता है। भारत और नेपाल के बीच युग युगांत्रों से रोटी बेटी का रिश्ता है इस खुली सीमा से लाखों लोगों और छोटे मझौल वाहनों का आना-जाना रहता है नेपाल के भीतर और रिश्तेदारियां होने के कारण लोगों का निरंतर आना-जाना बना रहता है। नेपाल ऐसे में भारतीय वाहनों के निर्धारित अवधि समाप्त होने पर लगने वाला भारी जुर्माना भारतीयों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। बुद्ध भूमि से बुलंद हुई आवाजरूगौतम बुद्ध ने इसी पवित्र माटी पर आंखें खोली थीं।भगवान बुद्ध ने यहीं से दुनिया को उपदेश देने का बीड़ा उठाया।उनका संदेश पत्थर का लकीर बना। सांसद विक्रम सिंह थापा के राजनीतिक विरासत की कर्मभूमि बुद्धभूमि ही है। उन्होंने अपने इसी कर्मस्थली से करोड़ों लोगों के रिश्तो को प्रभावित होने से बचाने। पर्यटन बढ़ावा। धार्मिक तथा पर्यटन स्थलों के दीदार करने। सुलग रहे जनआक्रोश को दबाने के लिए संसद में ओजस्वी अंदाज से अपनी आवाज बुलंद कर वालेन सरकार का ध्यानाकर्षण कराया । जो इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से अमिट औऱ शोभित रहकर मैत्री संबंधों की याद दिलाती रहेगी।गत गुरुवार को नेपाल के संसद में शून्य प्रहरकाल में सत्ता रुढ स्वतंत्र पार्टी के सांसद विक्रम सिंह थापा ने बड़े ही भावनात्मक,संजीदगी, गंभीरता और ओजस्वी तरीके से सदन के पटल पर अपनी बात रखी। थापा नें अपनें सारगर्भित आग्रह उद्बोधन में सरकार से मांग किया कि भारत नेपाल के बीच सीमा पार से आवा गमन को सहज औऱ सुगम बनाया जाए। उन्होंने अपने उद्बोधन में दोनों देशों के बीच रोटी- बेटी,धार्मिक सांस्कृतिक संबंधों का हवाला दिया । सांसद थापन सदन के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि भारत से आने वाली पर्यटकों को अस्थाई पैठारी (कस्टम शुल्क )के सेवा शर्तों को शिथिल कर सरल बनाया जाए।भारत नेपाल के बीच सामाजिक पारिवारिक रिश्ते बेहद मजबूत हैं। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद लगने वाला वाहनों पर जुर्माना लोगों के पर अधिक बोझ डालता है। लगाए जा रहे इस जुर्माने पर सरकार से पुनर्र समीक्षा का बड़े ही शालीनता किया।

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